नक्षत्र 10/27 · Magha

मघा नक्षत्र — Maghā

मघा सत्ताईस नक्षत्रों में 10वाँ है, निरयन राशिचक्र में 120° से 133°20′ तक का 13°20′ का खण्ड, सिंह के भीतर। यहाँ जन्मा चन्द्र विंशोत्तरी चक्र केतु की दशा (7 वर्ष) से खोलता है, खण्ड का केवल शेष भाग बचा रहता है। कुंडली मिलान में इसका गण राक्षस, योनि मूषक (चूहा), नाड़ी अन्त्य है।

एक दृष्टि में

क्रमांक
10 / 27गणित
विस्तार
120° – 133°20′ (13°20′)गणित
राशि
सिंहगणित
चरण (नवांश राशि)
1: मेष · 2: वृषभ · 3: मिथुन · 4: कर्कBPHS shodashavarga.11
स्वामी (विंशोत्तरी)
केतुBPHS C29.80
विंशोत्तरी वर्ष
7BPHS C29.80
गण
राक्षसMILAN.GANA
योनि
मूषक (चूहा)MILAN.YONI
नाड़ी
अन्त्यMILAN.NADI

ग्रंथों में इसका नाम

नीचे के श्लोक वे स्थान हैं जहाँ SIA का भण्डार इस नक्षत्र का नाम छापता है; ऊपर के दशा और मेलापक नियम वह सिद्धान्त हैं जिससे SIA गणना करता है।

BPHS C49.32बृहत् पराशर होरा शास्त्र · अब्दचर्याध्यायः v2, folio 706

आर्द्राश्लेषानुराधाश्च मघाश्चाथ घनिष्ठिकाः । उत्तराषाढसंज्ञश्च सर्वजिद्रोहिणी तथा ।।२।।

संस्करण की टीकादिन के १५ मुहूर्त्त क्रम से आर्द्रा, आश्लेषा, अनुराधा, मघा, धनिष्ठा, उत्तराषाढ़ा, सर्वजित् नाम का अभिजित्, रोहिणी।।२।।

BPHS abdacarya.2बृहत् पराशर होरा शास्त्र · अब्दचर्याध्यायः v2, folio 706

आर्द्राश्लेषानुराधाश्च मघाश्चाथ घनिष्ठिकाः । उत्तराषाढसंज्ञश्च सर्वजिद्रोहिणी तथा ।।२।।

संस्करण की टीकादिन के १५ मुहूर्त्त क्रम से आर्द्रा, आश्लेषा, अनुराधा, मघा, धनिष्ठा, उत्तराषाढ़ा, सर्वजित् नाम का अभिजित्, रोहिणी।।२।।

मेलापक सिद्धान्त

MILAN.GANAमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Gaṇa kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थगण (6 गुण) — हर नक्षत्र देव, मनुष्य या राक्षस गण (स्वभाव-वर्ग) का है। एक ही गण 6; देव–मनुष्य 5–6; देव–राक्षस 1; मनुष्य–राक्षस 0। यहाँ का बेमेल (गण दोष) मूल स्वभाव के टकराव का संकेत है, जो चन्द्र-राशि स्वामियों की मित्रता से कम होता है।

MILAN.YONIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Yoni kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थयोनि (4 गुण) — हर नक्षत्र का एक पशु-स्वभाव है (अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, गो, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल, सिंह)। एक ही योनि 4; मित्र योनियाँ 3; सम 2; अमित्र 1; शत्रु-जोड़े (अश्व–महिष, गज–सिंह, मेष–वानर, सर्प–नकुल, श्वान–मृग, मार्जार–मूषक, गो–व्याघ्र) 0। यह सहज, शारीरिक अनुकूलता का माप है।

MILAN.NADIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Nāḍī kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थनाड़ी (8 गुण) — सबसे भारी कूट। 27 नक्षत्र तीन नाड़ियों (आदि, मध्य, अन्त्य) में चक्र से बँटे हैं — शरीर-प्रकृति की धारा। भिन्न नाड़ी पूरे 8 देती है; एक ही नाड़ी 0 देती है और नाड़ी दोष है, मेलापक की सबसे गम्भीर आपत्ति (संतान और स्वास्थ्य से जोड़ी गई)। दोनों चन्द्र एक राशि में भिन्न नक्षत्रों में हों, या एक नक्षत्र में भिन्न चरणों में, तो दोष का शास्त्रीय परिहार है।

प्रश्न

मघा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी में केतु — मघा में चन्द्र होने पर पहली महादशा केतु की होती है, पूर्ण रूप में 7 वर्ष।

मघा के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

गण राक्षस, योनि मूषक (चूहा), नाड़ी अन्त्य — कुंडली मिलान के तीन नक्षत्र-आधारित कूट, 6, 4 और 8 गुण के।

मघा किस राशि में है?

सिंह — इसके चार चरण नवांश राशियों मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क में पड़ते हैं।

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