D4 — चतुर्थांश
चतुर्थांश (D4) हर राशि को 7°30′ के 4 समान भागों में बाँटता है और हर भाग को अपनी एक राशि देता है, जिससे किसी ग्रह की D4 स्थिति एक दूसरी कुंडली में एक राशि है। पराशर इसे सोलह वर्गों में गिनाते हैं, इसकी राशियाँ देने का नियम देते हैं, और विवेक अध्याय में कहते हैं कि यह भाग्य के लिए देखा जाता है। SIA इसे हर कुंडली के लिए D4 लग्न से पूर्ण-राशि भावों के साथ बनाता है और उस विषय के लिए राशि कुंडली के साथ पढ़ता है।
एक दृष्टि में
- विभाजन
- राशि में 4 · हर भाग 7°30′गणित
- विषय
- भाग्यBPHS viveka.2
- सोलह में स्थान
- 4 / 16BPHS shodashavarga.2
पराशर का नियम और विषय
स्वर्क्षादि केन्द्रपतयस्तुर्यांशेशाः क्रियादयः। सनकश्च सनन्दश्च कुमारश्च सनातनः।।८।।
संस्करण की टीकाएक राशि में ७ अंश ३० कला के चार चतुर्थांश होते हैं। प्रत्येक राशि में उस राशि से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम राशियों के स्वामी क्रम से चतुर्थांश के स्वामी होते हैं और सर्वदा क्रम से सनक, सनन्दन, सनत्कुमार और सनातन ये स्वामी होते हैं।।८।।
द्रेष्काणे भ्रातृजं सौख्यं तुर्यांशे भाग्यचिन्तनम्। पुत्रपौत्रादिकानां वै चिन्तनं सप्तमांशके।।२।।
संस्करण की टीकाद्रेष्काण से भाई का, चतुर्थांश से भाग्य का, सप्तमांश से पुत्र-पौत्रादि का।।२।।
प्रश्न
D4 कुंडली किस लिए देखी जाती है?
पराशर का विवेक अध्याय इसे भाग्य देता है; SIA उस विषय के लिए D4 को राशि कुंडली के साथ पढ़ता है और श्लोक का सन्दर्भ देता है।
D4 का एक भाग कितना बड़ा है?
7°30′ — तीस अंश को 4 से भाग देने पर।
ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।
SIA में अपनी कुंडली बनाइए — व्याख्या की हर पंक्ति के साथ उसका श्लोक।
सम्बन्धित
हर चिह्न SIA के भण्डार का वास्तविक श्लोक-क्रमांक है — वही चिह्न जो ऐप अपनी व्याख्याओं के साथ छापता है। · अद्यतन
इस पृष्ठ का सन्दर्भ दें: SIA Vigyan — https://siavigyan.com/hi/learn/varga/d4-chaturthamsha