ग्रह · Mars

मंगल — Maṅgala

मंगल कालपुरुष का सत्त्व और ग्रह-सभा के नेता हैं: क्रूर स्वभाव, रक्त नेत्र, उदार, क्रोधी, पित्त प्रकृति। वे भ्राता के कारक हैं, मेष और वृश्चिक के स्वामी, और मकर के 28° पर उच्च। विवाह-भावों पर मंगल की स्थिति ही मेलापक परम्परा मंगल दोष के रूप में पढ़ती है।

एक दृष्टि में

ग्रह-सभा में पद
नेता (सेनापति)BPHS C02.2
कालपुरुष में
सत्त्वBPHS C02.1
कारक
भ्राताBPHS C42.1
वर्ण और रूप
रक्त वर्ण, ऊँचा शरीरBPHS C02.3
अधिदेवता
कार्त्तिकेयBPHS C02.5
तत्त्व
अग्निBPHS C02.6
वर्ण (जाति)
क्षत्रियBPHS C02.7
गुण
तमस्BPHS C02.8
लिंग
पुरुषBPHS C02.8b
रस
तिक्तBPHS C02.17
शरीर-धातु
मज्जाBPHS C02.20b
स्थान
अग्निस्थानBPHS C02.21b
वस्त्र
लालBPHS C02.24
ऋतु
ग्रीष्मBPHS C02.25
धातु · मूल · जीव
धातुBPHS C02.27
उच्च
मकर 28°BPHS C02.38b
नीच
कर्क 28°BPHS C02.39b
मूलत्रिकोण
मेष 0°–12°BPHS C02.28
स्वराशि
मेष · वृश्चिकBPHS C01.7
नैसर्गिक मित्र
सूर्य · चन्द्र · गुरुBPHS C02.31
सम
शुक्र · शनिBPHS C02.31
नैसर्गिक शत्रु
बुधBPHS C02.31
विंशोत्तरी वर्ष
7 वर्ष (120 में से)BPHS C29.80
नक्षत्र (विंशोत्तरी स्वामित्व)
मृगशिरा · चित्रा · धनिष्ठागणित

पराशर मंगल पर

BPHS C02.11बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहस्वरूपाध्यायः v14, folio 28

क्रूररक्तेक्षणो भौमश्चपलोदारमूर्त्तिकः। पित्तप्रकृतिकः क्रोधी कृशमध्यतनुर्द्विज।।१४।।

संस्करण की टीकाभौम— क्रूर स्वभाव, रक्तवर्ण की दृष्टि, चपल, उदार स्वभाव, पित्त प्रकृति, क्रोधी, पतली मध्यम कद की शरीरवाला है।

BPHS C02.2बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहस्वरूपाध्यायः v3, folio 27

राजानौ भानुहिमगू नेता ज्ञेयो धरात्मजः। बुधो राजकुमारश्च सचिवौ गुरुभार्गवौ।।३।।

संस्करण की टीकाग्रहों में सूर्य और चन्द्रमा राजा, मंगल नेता, बुध राजकुमार, गुरु और शुक्र मन्त्री हैं।

BPHS C02.31बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहस्वरूपाध्यायः v45, folio 33

समौ सिताकीं शशिजश्च शत्रुर्मित्राणि शेषाः पृथिवीसुतस्य। शत्रुः शशी सूर्यसितौ च मित्रे समापरे स्युःशशिनन्दनस्य।।४५।।

संस्करण की टीकाभौम के शुक्र-शनि सम हैं, बुध शत्रु, शुक्र और शेष ग्रह मित्र हैं। बुध के चन्द्रमा शत्रु, सूर्य-शुक्र मित्र और शेष ग्रह सम हैं।

फलदीपिका — कारकत्व और रूप

PHAL C2.3फलदीपिका · Phaladīpikā 2.3

सत्त्वं भूफलितं सहोदरगुणं क्रौर्यं रणं साहसं विद्वेषं च महानसाग्निकनकज्ञात्यसत्रचोरारिपून् । उत्साहं परकामिनीरतिमसत्योक्तिं महीजाद्वदेद्वीर्यं चित्तसमुन्नतिं च कलुषं सेनाधिपत्यं क्षतम् ॥३॥

संस्करण की टीकाभौम से व्यक्ति के सत्त्व, भूमि से उत्पन्न पदार्थ (खनिज धातु, रत्नादि), सहोदर भाई के गुण, क्रूरता, युद्ध, साहस, विद्वेष, भोजनालय, अग्नि, स्वर्ण, ज्ञाति, शस्त्र, चोर, शत्रु, उत्साह, परस्त्री में अनुरक्ति, असत्य भाषण, पुरुषार्थ (वीर्य), चित्तवृत्ति का अभ्युत्थान, पापकर्म, सेनाधिपत्य और घाव आदि का विचार करना चाहिए ॥३॥

PHAL C2.10फलदीपिका · Phaladīpikā 2.10

मध्ये कृशः कुञ्चितदीप्तकेशः क्रूरेक्षणः पैत्तिक उग्रबुद्धिः । रक्ताम्बरो रक्ततनुर्महीजश्चण्डोऽत्युदारस्तरुणोऽतिमज्जः ॥१०॥

संस्करण की टीकाभौम के शरीर का मध्य भाग (कटि प्रदेश) अत्यन्त क्षीण है । उसके केश चमकीले और घुँघराले हैं। उसके नेत्रों से क्रूरता झलकती है तथा वह पित्त-प्रधान प्रकृति और उग्र बुद्धि से सम्पन्न है । उसका शरीर रक्त वर्ण है और वह रक्त वर्ण के ही वस्त्र धारण करता है । उसके शरीर में मज्जा की अधिकता है । उग्र स्वभाव का होने पर भी यह अति उदार स्वभाव का तरुण है ॥१०॥

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प्रश्न

मंगल किन राशियों के स्वामी हैं?

मेष और वृश्चिक

मंगल की विंशोत्तरी दशा कितने वर्ष की है?

120 वर्ष के चक्र में 7 वर्ष, नियत क्रम सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र में।

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