चन्द्र — Candra
चन्द्र कालपुरुष के मन और सूर्य के साथ ग्रहों में राजा हैं। पराशर के वर्णन में गोल देह, गौर, मधुर वाणी और चंचल; फलदीपिका की सूची में माता, मन और जल। चन्द्र का जन्म-नक्षत्र पूरी विंशोत्तरी दशा का बीज है, और चन्द्र की राशि व नक्षत्र ही कुंडली मिलान की तुलना का आधार हैं।
एक दृष्टि में
- ग्रह-सभा में पद
- राजाBPHS C02.2
- कालपुरुष में
- मनBPHS C02.1
- कारक
- माताBPHS C42.1
- वर्ण और रूप
- गौर वर्णBPHS C02.3
- अधिदेवता
- जलBPHS C02.5
- वर्ण (जाति)
- वैश्यBPHS C02.7
- गुण
- सत्त्वBPHS C02.8
- लिंग
- स्त्रीBPHS C02.8b
- रस
- लवणBPHS C02.17
- शरीर-धातु
- रक्तBPHS C02.20b
- स्थान
- जलाशयBPHS C02.21b
- वस्त्र
- श्वेत रेशमीBPHS C02.23
- ऋतु
- वर्षाBPHS C02.25
- धातु · मूल · जीव
- धातुBPHS C02.27
- उच्च
- वृषभ 3°BPHS C02.38b
- नीच
- वृश्चिक 3°BPHS C02.39b
- मूलत्रिकोण
- वृषभ 3°–30°BPHS C02.28
- स्वराशि
- कर्कBPHS C01.11
- नैसर्गिक मित्र
- सूर्य · बुधBPHS C02.30
- सम
- मंगल · गुरु · शुक्र · शनिBPHS C02.30
- नैसर्गिक शत्रु
- कोई नहींBPHS C02.30
- विंशोत्तरी वर्ष
- 10 वर्ष (120 में से)BPHS C29.80
- नक्षत्र (विंशोत्तरी स्वामित्व)
- रोहिणी · हस्त · श्रवणगणित
पराशर चन्द्र पर
बहु वातकफः प्राज्ञश्चन्द्रो वृत्ततनुर्द्विज। शुभदृक् मधुवाक्यश्च चञ्चलो मदनातुरः।।१३।।
संस्करण की टीकाचन्द्रमा— वायु और कफ से युक्त प्रकृति, बुद्धिमान्, गोल शरीर, सुन्दर नेत्र, मीठे वचन बोलनेवाला, चंचल और कामी है।
देवेज्यो ज्ञानसुखदो भृगुवीर्यप्रदायकः। विचार्यतामिदं सर्वं छायासूनुश्च दुःखदः।।२।।
संस्करण की टीकागुरु ज्ञान और सुख और शुक्र बल के तथा शनि दुःख के स्वामी हैं।
राजानौ भानुहिमगू नेता ज्ञेयो धरात्मजः। बुधो राजकुमारश्च सचिवौ गुरुभार्गवौ।।३।।
संस्करण की टीकाग्रहों में सूर्य और चन्द्रमा राजा, मंगल नेता, बुध राजकुमार, गुरु और शुक्र मन्त्री हैं।
रवेः समो ज्ञः सितसूर्यपुत्रावरी परे ये सुहृदो भवन्ति। चन्द्रस्य नारी रविचन्द्रपुत्रौ स्मृतास्तु शेषग्रहाः समाः।।४४।।
संस्करण की टीकासूर्य के बुध सम, शुक्र-शनि शत्रु और शेष चन्द्रमा, भौम, गुरु मित्र हैं। चन्द्रमा के कोई शत्रु नहीं हैं, सूर्य-बुध मित्र हैं और शेष ग्रह सम हैं।
फलदीपिका — कारकत्व और रूप
मातुः स्वस्ति मनःप्रसादमुदधिस्नानं सितं चामरं छत्रं सुव्यजनं फलानि मृदुलं पुष्पाणि सस्यं कृषिम् । कीर्तिं मौक्तिककांस्यरौप्यमधुरक्षीरादिवस्त्राम्बुगोयोषाप्तिं सुखभोजनं तनुसुखं रूपं वदेच्चन्द्रतः ॥२॥
संस्करण की टीकाचन्द्रमा से मातृसुख, मानसिक आह्लाद, सागरस्नान; शुभ्र चँवर, छत्र, पंखा आदि राजचिह्न; फल, पुष्प, अन्न, कृषिकार्य, यश-कीर्ति, मोती, काँसा, चाँदी, मिष्टान्न, खीर, वस्त्र, जल, गौ, स्त्री, भोजन, सुख, शारीरिक सुख और सौन्दर्य का विचार करना चाहिए ॥२॥
स्थूलो युवा च स्थविरः कृशः सितः कान्तेक्षणश्चासितसूक्ष्ममूर्धजः । रक्तैकसारो मृदुवाक् सितांशुको गौरः शशी वातकफात्मको मृदुः ॥९॥
संस्करण की टीकाचन्द्रमा स्थूल शरीर, युवा और प्रौढ़ वय, कृशगात्र, सुन्दर आकर्षक नेत्रों और काले छोटे केशों से युक्त, रक्ताधिक्य, मृदुभाषी, श्वेत वस्त्रधारी, गौर वर्ण और वात-कफ प्रधान प्रकृति और अत्यन्त मृदु स्वभाव का है ॥९॥
SIA इसके साथ क्या करता है
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प्रश्न
चन्द्र किन राशियों के स्वामी हैं?
कर्क
चन्द्र की विंशोत्तरी दशा कितने वर्ष की है?
120 वर्ष के चक्र में 10 वर्ष, नियत क्रम सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र में।
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सम्बन्धित
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