ग्रह · Sun

सूर्य — Sūrya

सूर्य कालपुरुष की आत्मा और ग्रहों के राजा हैं। पराशर उन्हें चौकोर देह, मधु के समान नेत्र और पित्त प्रकृति देते हैं; फलदीपिका उनसे पिता, स्वयं, अधिकार और प्रताप पढ़ती है। वे मेष के 10° पर उच्च हैं, सिंह के स्वामी हैं, और विंशोत्तरी चक्र के छह वर्ष रखते हैं।

एक दृष्टि में

ग्रह-सभा में पद
राजाBPHS C02.2
कालपुरुष में
आत्माBPHS C02.1
कारक
पिताBPHS C42.1
वर्ण और रूप
श्यामता लिए रक्त वर्णBPHS C02.3
अधिदेवता
अग्निBPHS C02.5
वर्ण (जाति)
क्षत्रियBPHS C02.7
गुण
सत्त्वBPHS C02.8
लिंग
पुरुषBPHS C02.8b
रस
कटुBPHS C02.17
शरीर-धातु
अस्थिBPHS C02.20b
स्थान
देवालयBPHS C02.21b
वस्त्र
लाल रेशमीBPHS C02.23
ऋतु
ग्रीष्मBPHS C02.25
धातु · मूल · जीव
मूलBPHS C02.27
उच्च
मेष 10°BPHS C02.38b
नीच
तुला 10°BPHS C02.39b
मूलत्रिकोण
सिंह 0°–20°BPHS C02.28
स्वराशि
सिंहBPHS C01.12
नैसर्गिक मित्र
चन्द्र · मंगल · गुरुBPHS C02.30
सम
बुधBPHS C02.30
नैसर्गिक शत्रु
शुक्र · शनिBPHS C02.30
विंशोत्तरी वर्ष
6 वर्ष (120 में से)BPHS C29.80
नक्षत्र (विंशोत्तरी स्वामित्व)
कृत्तिका · उत्तराफाल्गुनी · उत्तराषाढागणित

पराशर सूर्य पर

BPHS C02.9बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहस्वरूपाध्यायः v12, folio 28

मधुपिङ्गलदृक्सूर्यश्चतुरस्रः शुचिर्द्विज। पित्तप्रकृतिको श्रीमान्पुमानल्पकचो द्विज।।१२।।

संस्करण की टीकासूर्य— मधु के सदृश पीले नेत्रोंवाला, चौखूटी शरीर, स्वच्छ कान्ति वाला, पित्त प्रकृति, दर्शनीय, पुरुषग्रह, थोड़े बालों से युक्त स्वरूपवाला है।

BPHS C02.1बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहस्वरूपाध्यायः v2, folio 27

देवेज्यो ज्ञानसुखदो भृगुवीर्यप्रदायकः। विचार्यतामिदं सर्वं छायासूनुश्च दुःखदः।।२।।

संस्करण की टीकागुरु ज्ञान और सुख और शुक्र बल के तथा शनि दुःख के स्वामी हैं।

BPHS C02.2बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहस्वरूपाध्यायः v3, folio 27

राजानौ भानुहिमगू नेता ज्ञेयो धरात्मजः। बुधो राजकुमारश्च सचिवौ गुरुभार्गवौ।।३।।

संस्करण की टीकाग्रहों में सूर्य और चन्द्रमा राजा, मंगल नेता, बुध राजकुमार, गुरु और शुक्र मन्त्री हैं।

BPHS C02.30बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहस्वरूपाध्यायः v44, folio 33

रवेः समो ज्ञः सितसूर्यपुत्रावरी परे ये सुहृदो भवन्ति। चन्द्रस्य नारी रविचन्द्रपुत्रौ स्मृतास्तु शेषग्रहाः समाः।।४४।।

संस्करण की टीकासूर्य के बुध सम, शुक्र-शनि शत्रु और शेष चन्द्रमा, भौम, गुरु मित्र हैं। चन्द्रमा के कोई शत्रु नहीं हैं, सूर्य-बुध मित्र हैं और शेष ग्रह सम हैं।

फलदीपिका — कारकत्व और रूप

PHAL C2.1फलदीपिका · Phaladīpikā 2.1

ताम्रं स्वर्णं पितृशुभफलं चात्मसौख्यप्रतापं धैर्यं शौर्यं समितिविजयं राजसेवां प्रकाशम् । शैवं कार्यं वनगिरिगतिं होमकार्यप्रवृत्तिं देवस्थानं कथयतु बुधस्तैक्ष्ण्यमुत्साहमर्कात् ॥१॥

संस्करण की टीकाविज्ञ पुरुषों को ताँबा, सोना, पिता के शुभफल, जातक के स्वयं के सुख, प्रताप, धैर्य, शौर्य, युद्ध में विजय, राजसेवा, प्रकाश (ज्ञान), शिवभक्ति, वन एवं पर्वतीय प्रदेश की यात्रा, हवन, यज्ञादि कार्य में प्रवृत्ति, देवालय आदि का निर्माण, स्वंभावगत तीक्ष्णता और उत्साह आदि का विचार सूर्य से करना चाहिए ॥१॥ सूर्य उक्त समस्त पदार्थो एवं विषयों का कारक होता है ।

PHAL C2.8फलदीपिका · Phaladīpikā 2.8

पित्तास्थिसारोऽल्पकचश्च रक्तश्यामाकृतिः स्यान्मधुपिङ्गलाक्षः । कौसुम्भवासाश्चतुरस्रदेहः शूरः प्रचण्डः पृथुबाहुरर्कः ॥८॥

संस्करण की टीकासूर्य की प्रकृति पित्त-प्रधान है । वह पुष्ट अस्थियों वाला, अल्पकेशी, रक्ताभ श्यामल वर्ण, मधु (शहद) के समान पिङ्गल नेत्रों से युक्त है । यह रक्ताम्बर प्रिय है अर्थात् लाल वस्त्र धारण करता है । उसका शारीरिक गठन चौकोर है । वह शूरवीर, दीर्घ भुजाओं से युक्त अति प्रचण्ड है ।।८॥

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प्रश्न

सूर्य किन राशियों के स्वामी हैं?

सिंह

सूर्य की विंशोत्तरी दशा कितने वर्ष की है?

120 वर्ष के चक्र में 6 वर्ष, नियत क्रम सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र में।

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