नक्षत्र 22/27 · Shravana

श्रवण नक्षत्र — Śravaṇa

श्रवण सत्ताईस नक्षत्रों में 22वाँ है, निरयन राशिचक्र में 280° से 293°20′ तक का 13°20′ का खण्ड, मकर के भीतर। यहाँ जन्मा चन्द्र विंशोत्तरी चक्र चन्द्र की दशा (10 वर्ष) से खोलता है, खण्ड का केवल शेष भाग बचा रहता है। कुंडली मिलान में इसका गण देव, योनि वानर, नाड़ी अन्त्य है।

एक दृष्टि में

क्रमांक
22 / 27गणित
विस्तार
280° – 293°20′ (13°20′)गणित
राशि
मकरगणित
चरण (नवांश राशि)
1: मेष · 2: वृषभ · 3: मिथुन · 4: कर्कBPHS shodashavarga.11
स्वामी (विंशोत्तरी)
चन्द्रBPHS C29.80
विंशोत्तरी वर्ष
10BPHS C29.80
गण
देवMILAN.GANA
योनि
वानरMILAN.YONI
नाड़ी
अन्त्यMILAN.NADI

ग्रंथों में इसका नाम

नीचे के श्लोक वे स्थान हैं जहाँ SIA का भण्डार इस नक्षत्र का नाम छापता है; ऊपर के दशा और मेलापक नियम वह सिद्धान्त हैं जिससे SIA गणना करता है।

BPHS C21.34बृहत् पराशर होरा शास्त्र · ग्रहाणामवस्थाध्यायः v11, folio 234

मुदान्वितस्यापि दशाविपाके वस्त्रादिकं गन्धसुतीर्थधैर्यम्। पुराणधर्मश्रवणादिलाभं हयादियानाम्बरभूषणाप्तिम्।।११।।

संस्करण की टीकामुदित ग्रह की दशा में वस्त्र, गंध, तीर्थयात्रा, धैर्य, पुराण आदि का श्रवण, घोड़ा आदि सवारियों का लाभ, आभूषण का लाभ होता है।।११।।

BPHS C30.40बृहत् पराशर होरा शास्त्र · दशाध्यायः v70, folio 390

द्वितीयादिषु कोष्ठेषु वृश्चिकाद्व्यस्तमालिखेत् । प्राजापत्यमघेन्द्राग्नि श्रवणं च चतुष्टयम् ।।७०।।

संस्करण की टीकादूसरे आदि कोष्ठ में वृश्चिकादि उलटे राशियों को लिखे। उसमें रोहिणी, मघा, विशाखा और श्रवण इन चार नक्षत्रों को लिखे।।७०।।

मेलापक सिद्धान्त

MILAN.GANAमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Gaṇa kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थगण (6 गुण) — हर नक्षत्र देव, मनुष्य या राक्षस गण (स्वभाव-वर्ग) का है। एक ही गण 6; देव–मनुष्य 5–6; देव–राक्षस 1; मनुष्य–राक्षस 0। यहाँ का बेमेल (गण दोष) मूल स्वभाव के टकराव का संकेत है, जो चन्द्र-राशि स्वामियों की मित्रता से कम होता है।

MILAN.YONIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Yoni kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थयोनि (4 गुण) — हर नक्षत्र का एक पशु-स्वभाव है (अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, गो, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल, सिंह)। एक ही योनि 4; मित्र योनियाँ 3; सम 2; अमित्र 1; शत्रु-जोड़े (अश्व–महिष, गज–सिंह, मेष–वानर, सर्प–नकुल, श्वान–मृग, मार्जार–मूषक, गो–व्याघ्र) 0। यह सहज, शारीरिक अनुकूलता का माप है।

MILAN.NADIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Nāḍī kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थनाड़ी (8 गुण) — सबसे भारी कूट। 27 नक्षत्र तीन नाड़ियों (आदि, मध्य, अन्त्य) में चक्र से बँटे हैं — शरीर-प्रकृति की धारा। भिन्न नाड़ी पूरे 8 देती है; एक ही नाड़ी 0 देती है और नाड़ी दोष है, मेलापक की सबसे गम्भीर आपत्ति (संतान और स्वास्थ्य से जोड़ी गई)। दोनों चन्द्र एक राशि में भिन्न नक्षत्रों में हों, या एक नक्षत्र में भिन्न चरणों में, तो दोष का शास्त्रीय परिहार है।

प्रश्न

श्रवण नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी में चन्द्र — श्रवण में चन्द्र होने पर पहली महादशा चन्द्र की होती है, पूर्ण रूप में 10 वर्ष।

श्रवण के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

गण देव, योनि वानर, नाड़ी अन्त्य — कुंडली मिलान के तीन नक्षत्र-आधारित कूट, 6, 4 और 8 गुण के।

श्रवण किस राशि में है?

मकर — इसके चार चरण नवांश राशियों मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क में पड़ते हैं।

ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।

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