राशि 6/12 · Virgo

कन्या राशि — Kanyā

कन्या षष्ठ राशि है, कालपुरुष का कटि, स्वामी बुध। पराशर का राशिस्वरूप अध्याय इसे वर्ण, दिशा, जाति और उदय की रीति देता है; फलदीपिका बताती है कि कन्या लग्न में जन्मा व्यक्ति कैसा होता है। SIA जन्म-क्षण के लिए लग्न और हर ग्रह की राशि निकालता है और कन्या को नामित करने वाले नियम लागू करता है — नीचे के श्लोक वही हैं जिनसे वह पढ़ता है।

एक दृष्टि में

स्वामी
बुधBPHS C01.14
स्वभाव
द्विस्वभाव · शुभ, स्त्रीBPHS C01.5
कालपुरुष का अंग
कटिBPHS C01.4
तत्त्व · वर्ण (मेलापक)
पृथ्वी · वैश्यMILAN.VARNA
विस्तार
150°–180°गणित
यहाँ उच्च
बुध 15°BPHS C02.38b
यहाँ नीच
शुक्र 27°BPHS C02.39b
मूलत्रिकोण
बुध 15°–20°BPHS C02.28
वश्य राशियाँ
मिथुन · मीनMILAN.VASYA
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी (चरण 2, 3, 4) · हस्त (चरण 1, 2, 3, 4) · चित्रा (चरण 1, 2)गणित

पराशर कन्या राशि पर

BPHS C01.13बृहत् पराशर होरा शास्त्र · राशिस्वरूपाध्यायः v13, folio 24

पार्वतीयाथ कन्याख्या राशिर्दिनबलान्विता। शीर्षोदया च मध्याङ्गा द्विपाद्याम्यचरा स्मृता।।१३।।

संस्करण की टीकाकन्या राशि पर्वत में विशेष रुचिवाली, दिवाबली, शीर्षोदयराशि, मध्यम शरीर, द्विपद, दक्षिण दिशा में रहनेवाली, वैश्यवर्ण है।

BPHS C01.14बृहत् पराशर होरा शास्त्र · राशिस्वरूपाध्यायः v14, folio 25

ससस्यदहना वैश्या चित्रवर्णा प्रभञ्जिनी। कुमारी तमसायुक्ता बालभावा बुधाधिपः।।१४।।

संस्करण की टीकाधान को भूजती हुई, चित्र वर्ण (छींट) के वस्त्र को पहने हुई कन्या तमोगुण से युक्त बालभाव वाली है और बुध इसके स्वामी हैं।

फलदीपिका — कन्या लग्न में जन्म

PHAL C9.6फलदीपिका · Phaladīpikā 9.6

स्रस्तांसबाहुः परवित्तगेहैः संपूज्यते सत्यरतः प्रियोक्तिः । ब्रीडालसाक्षः सुरतप्रियः स्याच्छास्त्रार्थविच्चाल्पसुतोऽङ्गनायाम् ॥६॥

संस्करण की टीकायदि जन्मलग्न कन्या हो तो जातक के स्कन्ध और भुजाएँ झुके हुए होते हैं । वह सत्यवादी और प्रियवक्ता होता है तथा दूसरों के धन और गृह के अधिग्रहण से आदर प्राप्त करता है । वह लज्जासिक्त नेत्रों से युक्त, अत्यन्त कुशल, शास्त्र में पारग, अतिकामी और अल्प पुत्रवान् होता है ॥६॥

प्रश्न

कन्या राशि का स्वामी कौन है?

बुध (Mercury), जैसा पराशर राशिस्वरूप अध्याय में कहते हैं।

कन्या राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

उत्तराफाल्गुनी (चरण 2, 3, 4), हस्त (चरण 1, 2, 3, 4), चित्रा (चरण 1, 2) — 3°20′ के नौ चरण एक राशि बनाते हैं।

कन्या चर, स्थिर या द्विस्वभाव राशि है?

द्विस्वभाव — मेष से राशियाँ क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव होती हैं (BPHS अध्याय 1)।

ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।

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