तुला राशि — Tulā
तुला सप्तम राशि है, कालपुरुष का बस्ति, स्वामी शुक्र। पराशर का राशिस्वरूप अध्याय इसे वर्ण, दिशा, जाति और उदय की रीति देता है; फलदीपिका बताती है कि तुला लग्न में जन्मा व्यक्ति कैसा होता है। SIA जन्म-क्षण के लिए लग्न और हर ग्रह की राशि निकालता है और तुला को नामित करने वाले नियम लागू करता है — नीचे के श्लोक वही हैं जिनसे वह पढ़ता है।
एक दृष्टि में
- स्वामी
- शुक्रBPHS C01.15
- स्वभाव
- चर · क्रूर, पुरुषBPHS C01.5
- कालपुरुष का अंग
- बस्तिBPHS C01.4
- तत्त्व · वर्ण (मेलापक)
- वायु · शूद्रMILAN.VARNA
- विस्तार
- 180°–210°गणित
- यहाँ उच्च
- शनि 20°BPHS C02.38b
- यहाँ नीच
- सूर्य 10°BPHS C02.39b
- मूलत्रिकोण
- शुक्र 0°–15°BPHS C02.29
- वश्य राशियाँ
- कन्या · मकरMILAN.VASYA
- नक्षत्र
- चित्रा (चरण 3, 4) · स्वाती (चरण 1, 2, 3, 4) · विशाखा (चरण 1, 2, 3)गणित
पराशर तुला राशि पर
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भावार्थतुला राशि शीर्षोदयी, दिवाबली, शूद्र वर्ण, रजोगुणी, पश्चिम दिशा की स्वामी, मध्यम शरीर वाली और द्विपद है; शुक्र इसके स्वामी हैं।
फलदीपिका — तुला लग्न में जन्म
चलत्कृशाङ्गोऽल्पसुतोऽतिभक्तो देवद्विजानामटनो द्विनामा । प्रांशुश्च दक्षः क्रयविक्रयेषु धीरोऽदयस्तौलिनि मध्यवादी ॥७॥
संस्करण की टीकाजिसका जन्म तुला राशि के लग्न में होता है वह दुर्बल, चपल और लम्बा शरीर, अल्प सन्तति वाला, देवता और ब्राह्मणों के प्रति आस्थावान्, यायावर और दो नामों से विख्यात होता है । क्रय-विक्रय के व्यवसाय में वह अति कुशल होता है तथा धैर्यवान् और निर्मम प्रकृति का व्यक्ति होता है ॥७॥
प्रश्न
तुला राशि का स्वामी कौन है?
शुक्र (Venus), जैसा पराशर राशिस्वरूप अध्याय में कहते हैं।
तुला राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?
चित्रा (चरण 3, 4), स्वाती (चरण 1, 2, 3, 4), विशाखा (चरण 1, 2, 3) — 3°20′ के नौ चरण एक राशि बनाते हैं।
तुला चर, स्थिर या द्विस्वभाव राशि है?
चर — मेष से राशियाँ क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव होती हैं (BPHS अध्याय 1)।
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