शुक्र — Śukra
शुक्र कालपुरुष का वीर्य और सभा के मन्त्री हैं: सुन्दर, सुखी, काव्यकार। कलत्र के कारक, वृष और तुला के स्वामी, मीन के 27° पर उच्च, और सबसे लम्बी विंशोत्तरी दशा — बीस वर्ष — के अधिकारी।
एक दृष्टि में
- ग्रह-सभा में पद
- मन्त्रीBPHS C02.2
- कालपुरुष में
- वीर्य (बल)BPHS C02.1
- कारक
- स्त्रीBPHS C42.1
- वर्ण और रूप
- श्याम वर्णBPHS C02.4
- अधिदेवता
- इन्द्राणीBPHS C02.5
- तत्त्व
- जलBPHS C02.6
- वर्ण (जाति)
- ब्राह्मणBPHS C02.7
- गुण
- रजस्BPHS C02.8
- लिंग
- स्त्रीBPHS C02.8b
- रस
- खट्टा (अम्ल)BPHS C02.17
- शरीर-धातु
- वीर्यBPHS C02.20b
- स्थान
- शय्यास्थानBPHS C02.21b
- वस्त्र
- रेशमी (क्षौम)BPHS C02.23
- ऋतु
- वसन्तBPHS C02.25
- धातु · मूल · जीव
- मूलBPHS C02.27
- उच्च
- मीन 27°BPHS C02.38b
- नीच
- कन्या 27°BPHS C02.39b
- मूलत्रिकोण
- तुला 0°–15°BPHS C02.29
- स्वराशि
- वृषभ · तुलाBPHS C01.8
- नैसर्गिक मित्र
- बुध · शनिBPHS C02.31
- सम
- मंगल · गुरुBPHS C02.31
- नैसर्गिक शत्रु
- सूर्य · चन्द्रBPHS C02.31
- विंशोत्तरी वर्ष
- 20 वर्ष (120 में से)BPHS C29.80
- नक्षत्र (विंशोत्तरी स्वामित्व)
- भरणी · पूर्वाफाल्गुनी · पूर्वाषाढागणित
पराशर शुक्र पर
सुखी कान्तवपुः श्रेष्ठ सुलोचनो भृगोः सुतः। काव्यकर्त्ता कफाधिक्यानिलात्मा वक्रमूर्धजः।।१७।।
संस्करण की टीकाशुक्र— सुन्दर शरीर, सुखी, अच्छे सुन्दर नेत्रोंवाला, काव्य (कविता) करनेवाला, कफ-वायुमिश्रित प्रकृति, टेढ़े शिर के बालों वाला है। [पृष्ठ पर इसका अंक ।।१६।। छपा है — मुद्रण-दोष; इसकी हिन्दी ।।१७।। देती है]
राजानौ भानुहिमगू नेता ज्ञेयो धरात्मजः। बुधो राजकुमारश्च सचिवौ गुरुभार्गवौ।।३।।
संस्करण की टीकाग्रहों में सूर्य और चन्द्रमा राजा, मंगल नेता, बुध राजकुमार, गुरु और शुक्र मन्त्री हैं।
समौ सिताकीं शशिजश्च शत्रुर्मित्राणि शेषाः पृथिवीसुतस्य। शत्रुः शशी सूर्यसितौ च मित्रे समापरे स्युःशशिनन्दनस्य।।४५।।
संस्करण की टीकाभौम के शुक्र-शनि सम हैं, बुध शत्रु, शुक्र और शेष ग्रह मित्र हैं। बुध के चन्द्रमा शत्रु, सूर्य-शुक्र मित्र और शेष ग्रह सम हैं।
फलदीपिका — कारकत्व और रूप
सम्पद्वाहनवस्त्रभूषणनिधिद्रव्याणि तौर्यत्रिकं भार्यासौख्यसुगन्धपुष्पमदनव्यापारशय्यालयान् । श्रीमत्त्वं कवितासुखं बहुवधूसङ्गं विलासं मदं साचिव्यं सरसोक्तिमाह भृगुजादुद्वाहकर्मोत्सवम् ॥६॥
संस्करण की टीकासम्पत्ति, वाहन, वस्त्र, आभूषण आदि का सुख, धनकोश; नृत्य, गायन, वादन आदि ललित कला; स्त्रीसुख, सुगन्धि, पुष्प, कामवासना, शय्या, भवन, धनसम्पन्नता, कवित्वशक्ति, अनेक स्त्रियों से विलास, कामुकता, मन्त्रित्व, मिष्टवाक् और विवाहोत्सव आदि का विचार शुक्र से करना चाहिए ॥६॥
चित्राम्बराकुञ्चितकृष्णकेशः स्थूलाङ्गदेहश्च कफानिलात्मा । दूर्वाङ्कुराभः कमनो विशालनेत्रो भृगुः साधितशुक्रवृद्धिः ॥१३॥
संस्करण की टीकारंग-बिरंगे वस्त्र धारण किये, काले घुँघराले केश, स्थूल अङ्ग और शरीर, कफ-वायु प्रधान (कफ और वायु तत्त्व पर अधिकार रखने वाला), दूर्वा के अङ्कुर के समान कान्ति से युक्त, कमनीय, विशाल नेत्रों से युक्त तथा पौरुष शक्तिसम्पन्न होता है अर्थात् पौरुषशक्ति पर शुक्र का अधिकार होता है ॥१३॥
SIA इसके साथ क्या करता है
SIA जन्म-क्षण के लिए शुक्र का निरयन भोगांश अपने सूर्यसिद्धान्त मॉडल से निकालता है, उसे राशि, भाव और सभी सोलह वर्गों में रखता है, उसकी अवस्था बताता है, और अपने भण्डार का हर वह नियम लागू करता है जिसकी शर्त शुक्र को नामित करती है — हर एक अपने श्लोक के साथ। ग्रह की स्थिति और दशा-अवधियाँ नि:शुल्क कुंडली-दृश्य का भाग हैं।
प्रश्न
शुक्र किन राशियों के स्वामी हैं?
वृषभ और तुला
शुक्र की विंशोत्तरी दशा कितने वर्ष की है?
120 वर्ष के चक्र में 20 वर्ष, नियत क्रम सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र में।
ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।
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सम्बन्धित
हर चिह्न SIA के भण्डार का वास्तविक श्लोक-क्रमांक है — वही चिह्न जो ऐप अपनी व्याख्याओं के साथ छापता है। · अद्यतन
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