वृश्चिक राशि — Vṛścika
वृश्चिक अष्टम राशि है, कालपुरुष का गुह्य स्थान, स्वामी मंगल। पराशर का राशिस्वरूप अध्याय इसे वर्ण, दिशा, जाति और उदय की रीति देता है; फलदीपिका बताती है कि वृश्चिक लग्न में जन्मा व्यक्ति कैसा होता है। SIA जन्म-क्षण के लिए लग्न और हर ग्रह की राशि निकालता है और वृश्चिक को नामित करने वाले नियम लागू करता है — नीचे के श्लोक वही हैं जिनसे वह पढ़ता है।
एक दृष्टि में
- स्वामी
- मंगलBPHS C01.16
- स्वभाव
- स्थिर · शुभ, स्त्रीBPHS C01.5
- कालपुरुष का अंग
- गुह्य स्थानBPHS C01.4
- तत्त्व · वर्ण (मेलापक)
- जल · ब्राह्मणMILAN.VARNA
- विस्तार
- 210°–240°गणित
- यहाँ नीच
- चन्द्र 3°BPHS C02.39b
- वश्य राशियाँ
- कर्कMILAN.VASYA
- नक्षत्र
- विशाखा (चरण 4) · अनुराधा (चरण 1, 2, 3, 4) · ज्येष्ठा (चरण 1, 2, 3, 4)गणित
पराशर वृश्चिक राशि पर
शीर्षोदयोऽथ स्वल्पाङ्गो बहुपाद्ब्राह्मणो बली। सौम्यस्थो दिनवीर्याढ्यः पिशङ्गो जलभूचरः। रोमस्वाढ्योऽतितीक्ष्णाङ्गो वृश्चिकश्च कुजाधिपः।।१६।।
संस्करण की टीकावृश्चिक राशि— शीर्षोदय राशि, छोटा शरीर, अनेक चरण, ब्राह्मण वर्ण, उत्तर दिशा में बली, दिवाबली, धुम्रवर्ण जलीय भूमि पर चलने वाली है। रोम से युक्त शरीर, अत्यन्त तीखे अंगोवाली है और भौम स्वामी हैं।
फलदीपिका — वृश्चिक लग्न में जन्म
वृत्तोरुजङ्घः पृथुनेत्रवक्षा रोगी शिशुत्वे गुरुतातहीनः । क्रूरक्रियो राजकुलाभिमुख्यः कीटेऽब्जरेखाङ्कितपाणिपादः ॥८॥
संस्करण की टीकावृश्चिक लग्न में उत्पन्न व्यक्ति की जंघाएँ और घुटने गोलाई लिये होते हैं । उसके नेत्र और वक्ष विशाल होते हैं । यह रोगी और बाल्यकाल में ही पिता और गुरुजनों से इसका विछोह हो जाता है । यह स्वभाव से क्रूर एवं राजकुल का प्रमुख होता है तथा उसके हाथ और पैरों में कमलरेखाएँ (पद्मरेखा) होती हैं ॥८॥
प्रश्न
वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?
मंगल (Mars), जैसा पराशर राशिस्वरूप अध्याय में कहते हैं।
वृश्चिक राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?
विशाखा (चरण 4), अनुराधा (चरण 1, 2, 3, 4), ज्येष्ठा (चरण 1, 2, 3, 4) — 3°20′ के नौ चरण एक राशि बनाते हैं।
वृश्चिक चर, स्थिर या द्विस्वभाव राशि है?
स्थिर — मेष से राशियाँ क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव होती हैं (BPHS अध्याय 1)।
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