राशि 4/12 · Cancer

कर्क राशि — Karka

कर्क चतुर्थ राशि है, कालपुरुष का हृदय, स्वामी चन्द्र। पराशर का राशिस्वरूप अध्याय इसे वर्ण, दिशा, जाति और उदय की रीति देता है; फलदीपिका बताती है कि कर्क लग्न में जन्मा व्यक्ति कैसा होता है। SIA जन्म-क्षण के लिए लग्न और हर ग्रह की राशि निकालता है और कर्क को नामित करने वाले नियम लागू करता है — नीचे के श्लोक वही हैं जिनसे वह पढ़ता है।

एक दृष्टि में

स्वामी
चन्द्रBPHS C01.11
स्वभाव
चर · शुभ, स्त्रीBPHS C01.5
कालपुरुष का अंग
हृदयBPHS C01.4
तत्त्व · वर्ण (मेलापक)
जल · ब्राह्मणMILAN.VARNA
विस्तार
90°–120°गणित
यहाँ उच्च
गुरु 5°BPHS C02.38b
यहाँ नीच
मंगल 28°BPHS C02.39b
वश्य राशियाँ
वृश्चिक · धनुMILAN.VASYA
नक्षत्र
पुनर्वसु (चरण 4) · पुष्य (चरण 1, 2, 3, 4) · आश्लेषा (चरण 1, 2, 3, 4)गणित

पराशर कर्क राशि पर

BPHS C01.10बृहत् पराशर होरा शास्त्र · राशिस्वरूपाध्यायः v10, folio 24

पाटलो वनचारी च ब्राह्मणो निशि वीर्यवान्।।१०।।

संस्करण की टीकाकर्क राशि का पाटल (थोड़ा लाल और सफेद मिला हुआ) वर्ण, वनचारी, ब्राह्मण वर्ण, रात में बली है।

BPHS C01.11बृहत् पराशर होरा शास्त्र · राशिस्वरूपाध्यायः v11, folio 24

बहुपटुतरः स्थौल्यतनुः सत्त्वगुणी बली। पृष्ठोदयी कर्कराशिर्मृगाङ्कोऽधिपतिः स्मृतः।।११।।

संस्करण की टीकाअत्यन्त विद्वान्, स्थूल शरीर, जल में रहने वाली, पृष्ठोदयी राशि है और चन्द्रमा इसके स्वामी हैं।

फलदीपिका — कर्क लग्न में जन्म

PHAL C9.4फलदीपिका · Phaladīpikā 9.4

स्त्रीनिर्जितः पीनगलः समित्रो बह्वालयस्तुङ्गकटिर्धनाढ्यः । ह्रस्वश्च वक्रो द्रुतगः कुलीरे मेधान्वितस्तोयरतोऽल्पपुत्रः ॥४॥

संस्करण की टीकाकर्कलग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति स्त्रियों से हारा हुआ तथा मोटे गले का व्यक्ति होता है । उसके अनेक मित्र होते हैं तथा अनेक भवनों का वह स्वामी और धनसम्पन्न होता है । उसकी कमर अतिस्थूल होती है । वह नाटे कद-काठी का, तीव्र गति से चलने वाला, मेधावी होता है तथा जल से उसे विशेष लगाव होता है तथा उसके कम सन्तानें होती हैं ॥४॥

प्रश्न

कर्क राशि का स्वामी कौन है?

चन्द्र (Moon), जैसा पराशर राशिस्वरूप अध्याय में कहते हैं।

कर्क राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

पुनर्वसु (चरण 4), पुष्य (चरण 1, 2, 3, 4), आश्लेषा (चरण 1, 2, 3, 4) — 3°20′ के नौ चरण एक राशि बनाते हैं।

कर्क चर, स्थिर या द्विस्वभाव राशि है?

चर — मेष से राशियाँ क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव होती हैं (BPHS अध्याय 1)।

ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।

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