D1 — क्षेत्र
क्षेत्र (D1) हर राशि को 30° के 1 समान भाग में बाँटता है और हर भाग को अपनी एक राशि देता है, जिससे किसी ग्रह की D1 स्थिति एक दूसरी कुंडली में एक राशि है। पराशर इसे सोलह वर्गों में गिनाते हैं, इसकी राशियाँ देने का नियम देते हैं, और विवेक अध्याय में कहते हैं कि यह देह के लिए देखा जाता है। SIA इसे हर कुंडली के लिए D1 लग्न से पूर्ण-राशि भावों के साथ बनाता है और उस विषय के लिए राशि कुंडली के साथ पढ़ता है।
एक दृष्टि में
- विभाजन
- राशि में 1 · हर भाग 30°गणित
- विषय
- देहBPHS viveka.1
- सोलह में स्थान
- 1 / 16BPHS shodashavarga.2
पराशर का नियम और विषय
तत्क्षेत्रं यस्य खेटस्य राशेर्यो यस्य नायकः। सूर्येन्दोर्विषमे राशौ समे तद्विपरीतकम्।।४।।
संस्करण की टीकाजो ग्रह जिस राशि का स्वामी है वही उसका गृह है। विषम राशि में पहली होरा सूर्य की और दूसरी चन्द्रमा की होती है। सम राशि में पहली होरा चन्द्रमा की और दूसरी सूर्य की होती है।।४।।
अथ षोडशवर्गेषु चिन्ता लग्नं वदाम्यहम्। लग्नं देहस्य विज्ञानं होरायां सम्पदादिकम्।।१।।
संस्करण की टीकाअब मैं षोडश वर्गों से विचारणीय विषयों को कह रहा हूँ। लग्न से शरीर सम्बंधी शुभ-अशुभ का विचार करना चाहिए, होरा से द्रव्य का।।१।।
प्रश्न
D1 कुंडली किस लिए देखी जाती है?
पराशर का विवेक अध्याय इसे देह देता है; SIA उस विषय के लिए D1 को राशि कुंडली के साथ पढ़ता है और श्लोक का सन्दर्भ देता है।
D1 का एक भाग कितना बड़ा है?
30° — तीस अंश को 1 से भाग देने पर।
ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।
SIA में अपनी कुंडली बनाइए — व्याख्या की हर पंक्ति के साथ उसका श्लोक।
सम्बन्धित
हर चिह्न SIA के भण्डार का वास्तविक श्लोक-क्रमांक है — वही चिह्न जो ऐप अपनी व्याख्याओं के साथ छापता है। · अद्यतन
इस पृष्ठ का सन्दर्भ दें: SIA Vigyan — https://siavigyan.com/hi/learn/varga/d1-rashi