D10 — दशमांश
दशमांश (D10) हर राशि को 3° के 10 समान भागों में बाँटता है और हर भाग को अपनी एक राशि देता है, जिससे किसी ग्रह की D10 स्थिति एक दूसरी कुंडली में एक राशि है। पराशर इसे सोलह वर्गों में गिनाते हैं, इसकी राशियाँ देने का नियम देते हैं, और विवेक अध्याय में कहते हैं कि यह महत्फल के लिए देखा जाता है। सिया इसे हर कुंडली के लिए D10 लग्न से पूर्ण-राशि भावों के साथ बनाती है और उस विषय के लिए राशि कुंडली के साथ पढ़ती है।
एक दृष्टि में
- विभाजन
- राशि में 10 · हर भाग 3°गणित
- विषय
- महत्फलBPHS viveka.3
- सोलह में स्थान
- 7 / 16BPHS shodashavarga.2
पराशर का नियम और विषय
दिगंशयाः ततश्चोजे युग्मे तन्नवमाद्ददेत्। पूर्वादि दश दिक्पाला इन्द्राग्नियमराक्षसाः।।१२।।
संस्करण की टीकाएक राशि में दश दशमांश प्रत्येक ३ अंश के होते हैं। यदि विषम राशि लग्न हो तो उसी राशि से और सम राशि हो तो उससे नवीं राशि से दश दशमांश होते हैं।।१२।।
नवमांशे कलत्राणां दशमांशे महत्फलम्। द्वादशांशे तथा पित्रोश्चिन्तनं षोडशांशके।।३।।
संस्करण की टीकानवमांश से स्त्री का, दशमांश से बड़े कार्यों का (राजसम्बंधी), द्वादशांश से माता पिता का, षोडशांश से वाहन के सुख-दुःख का।।३।।
प्रश्न
D10 कुंडली किस लिए देखी जाती है?
पराशर का विवेक अध्याय इसे महत्फल देता है; सिया उस विषय के लिए D10 को राशि कुंडली के साथ पढ़ती है और श्लोक का सन्दर्भ देती है।
D10 का एक भाग कितना बड़ा है?
3° — तीस अंश को 10 से भाग देने पर।
ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।
सिया में अपनी कुंडली बनाइए — व्याख्या की हर पंक्ति के साथ उसका श्लोक।
सम्बन्धित
हर चिह्न सिया के भण्डार का वास्तविक श्लोक-क्रमांक है — वही चिह्न जो ऐप अपनी व्याख्याओं के साथ छापता है। · अद्यतन
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