नक्षत्र 17/27 · Anuradha

अनुराधा नक्षत्र — Anurādhā

अनुराधा सत्ताईस नक्षत्रों में 17वाँ है, निरयन राशिचक्र में 213°20′ से 226°40′ तक का 13°20′ का खण्ड, वृश्चिक के भीतर। यहाँ जन्मा चन्द्र विंशोत्तरी चक्र शनि की दशा (19 वर्ष) से खोलता है, खण्ड का केवल शेष भाग बचा रहता है। कुंडली मिलान में इसका गण देव, योनि मृग (हिरण), नाड़ी मध्य है।

एक दृष्टि में

क्रमांक
17 / 27गणित
विस्तार
213°20′ – 226°40′ (13°20′)गणित
राशि
वृश्चिकगणित
चरण (नवांश राशि)
1: सिंह · 2: कन्या · 3: तुला · 4: वृश्चिकBPHS shodashavarga.11
स्वामी (विंशोत्तरी)
शनिBPHS C29.80
विंशोत्तरी वर्ष
19BPHS C29.80
गण
देवMILAN.GANA
योनि
मृग (हिरण)MILAN.YONI
नाड़ी
मध्यMILAN.NADI

ग्रंथों में इसका नाम

नीचे के श्लोक वे स्थान हैं जहाँ SIA का भण्डार इस नक्षत्र का नाम छापता है; ऊपर के दशा और मेलापक नियम वह सिद्धान्त हैं जिससे SIA गणना करता है।

BPHS C50.22बृहत् पराशर होरा शास्त्र · अब्दचर्याध्यायः v70, folio 715

मित्रान्नवक्रमात्प्रोक्तास्तत्तदेशेषु सर्वदा । अक्षिणी पंचदश च नखास्तत्त्वं तथामराः ।।७०।। सत्र्यंशाश्चषडंशोनाश्चत्वारिंशत्क्रमादथ । शतं खेष्विंदवः प्रोक्ता विनाडीत्तनयोऽपिच ।।७१।। काल्यंशवद्यर्धहोरांशभोगकालः प्रकीर्त्तितः । प्रमाणराशयश्चैते भागहारा कलात्मकाः ।।७२।। तत्तद्देशकला इच्छाराशयो गुणराशयः । कटुको मधुरत्तिक्तः कषायो लवणाम्लकौ ।।७३।। कालांशेक्रमतो गण्याःषष्ठ्यंशेव्युत्क्रमात्स्मृताः । त्रिंशांशेतु कषायादिःकालहोरांशके पुनः ।।७४।।

संस्करण की टीकाऔर अनुराधा से ७ ये नक्षत्र पूर्वोक्त अंशों में रहते हैं क्रम से २।१५।२०।२५।३३ ।।७०।। ३३।३३।४०।१००।१५० ये नाडियाँ अर्धहोरा आदि के योगकाल हैं।।७१।। कलांश में उत्पन्न हुये का कटुक, मीठा, तीता, कषैला, नमक, अम्ल।।७२-७३।। क्रम से गणना करने से जो रस आवे वह उस वर्ष में उसे प्रिय होता है। षष्ट्यंश में उसे अम्ल से कटु पर्यन्त इस क्रम से, त्रिशांश में कषाय से तिक्त पर्यन्त।।७४।।

मेलापक सिद्धान्त

MILAN.GANAमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Gaṇa kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थगण (6 गुण) — हर नक्षत्र देव, मनुष्य या राक्षस गण (स्वभाव-वर्ग) का है। एक ही गण 6; देव–मनुष्य 5–6; देव–राक्षस 1; मनुष्य–राक्षस 0। यहाँ का बेमेल (गण दोष) मूल स्वभाव के टकराव का संकेत है, जो चन्द्र-राशि स्वामियों की मित्रता से कम होता है।

MILAN.YONIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Yoni kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थयोनि (4 गुण) — हर नक्षत्र का एक पशु-स्वभाव है (अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, गो, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल, सिंह)। एक ही योनि 4; मित्र योनियाँ 3; सम 2; अमित्र 1; शत्रु-जोड़े (अश्व–महिष, गज–सिंह, मेष–वानर, सर्प–नकुल, श्वान–मृग, मार्जार–मूषक, गो–व्याघ्र) 0। यह सहज, शारीरिक अनुकूलता का माप है।

MILAN.NADIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Nāḍī kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थनाड़ी (8 गुण) — सबसे भारी कूट। 27 नक्षत्र तीन नाड़ियों (आदि, मध्य, अन्त्य) में चक्र से बँटे हैं — शरीर-प्रकृति की धारा। भिन्न नाड़ी पूरे 8 देती है; एक ही नाड़ी 0 देती है और नाड़ी दोष है, मेलापक की सबसे गम्भीर आपत्ति (संतान और स्वास्थ्य से जोड़ी गई)। दोनों चन्द्र एक राशि में भिन्न नक्षत्रों में हों, या एक नक्षत्र में भिन्न चरणों में, तो दोष का शास्त्रीय परिहार है।

प्रश्न

अनुराधा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी में शनि — अनुराधा में चन्द्र होने पर पहली महादशा शनि की होती है, पूर्ण रूप में 19 वर्ष।

अनुराधा के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

गण देव, योनि मृग (हिरण), नाड़ी मध्य — कुंडली मिलान के तीन नक्षत्र-आधारित कूट, 6, 4 और 8 गुण के।

अनुराधा किस राशि में है?

वृश्चिक — इसके चार चरण नवांश राशियों सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक में पड़ते हैं।

ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।

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