राशि 12/12 · Pisces

मीन राशि — Mīna

मीन द्वादश राशि है, कालपुरुष का चरण, स्वामी गुरु। पराशर का राशिस्वरूप अध्याय इसे वर्ण, दिशा, जाति और उदय की रीति देता है; फलदीपिका बताती है कि मीन लग्न में जन्मा व्यक्ति कैसा होता है। SIA जन्म-क्षण के लिए लग्न और हर ग्रह की राशि निकालता है और मीन को नामित करने वाले नियम लागू करता है — नीचे के श्लोक वही हैं जिनसे वह पढ़ता है।

एक दृष्टि में

स्वामी
गुरुBPHS C01.24
स्वभाव
द्विस्वभाव · शुभ, स्त्रीBPHS C01.5
कालपुरुष का अंग
चरणBPHS C01.5
तत्त्व · वर्ण (मेलापक)
जल · ब्राह्मणMILAN.VARNA
विस्तार
330°–360°गणित
यहाँ उच्च
शुक्र 27°BPHS C02.38b
यहाँ नीच
बुध 15°BPHS C02.39b
वश्य राशियाँ
मकरMILAN.VASYA
नक्षत्र
पूर्वाभाद्रपदा (चरण 4) · उत्तराभाद्रपदा (चरण 1, 2, 3, 4) · रेवती (चरण 1, 2, 3, 4)गणित

पराशर मीन राशि पर

BPHS C01.22बृहत् पराशर होरा शास्त्र · राशिस्वरूपाध्यायः v23, folio 26

जली सत्त्वगुणाढ्यश्च स्वस्थो जलचरो द्विजः। अपदो मध्यदेही च सौम्यस्थो ह्युभयोदयी।।२३।।

संस्करण की टीकाजलचर, सतोगुणी, ब्राह्मण वर्ण, चरण हीन, मध्यम शरीर, उत्तर दिशा का स्वामी, उभयोदयी है।

BPHS C01.24बृहत् पराशर होरा शास्त्र · राशिस्वरूपाध्यायः v24, folio 26

सुराचार्याधिपश्चास्य राशीनां गदितं मया। त्रिशद्भागात्मकः स्थूलसूक्ष्माकरफलाय च।।२४।।

संस्करण की टीकागुरु स्वामी हैं। इस प्रकार मैंने ३० अंश के राशियों का स्वरूप कहा, इनके स्थूल और सूक्ष्म फल ग्रन्थों में कहे हुए हैं।

फलदीपिका — मीन लग्न में जन्म

PHAL C9.12फलदीपिका · Phaladīpikā 9.12

अत्यम्बुपानः समचारुदेहः स्वदारगस्तोयजवित्तभोक्ता । विद्वान्कृतज्ञोऽभिभवत्यमित्रान् शुभेक्षणो भाग्ययुतोऽन्त्यराशौ ॥१२॥

संस्करण की टीकामीन राशि के लग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति अधिक जल पीता है । उसके शरीर की बनावट सम (संतुलित अनुपात में) और सुन्दर होती है । वह अपनी पत्नी में अनुरक्त होता है । वह जलीय पदार्थों के व्यवसाय से अर्जित धन का भोग करने वाला, विद्वान्, कृतज्ञ, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला, शुभ और सुन्दर नेत्रों से युक्त एवं भाग्यशाली व्यक्ति होता है ॥१२॥

प्रश्न

मीन राशि का स्वामी कौन है?

गुरु (Jupiter), जैसा पराशर राशिस्वरूप अध्याय में कहते हैं।

मीन राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

पूर्वाभाद्रपदा (चरण 4), उत्तराभाद्रपदा (चरण 1, 2, 3, 4), रेवती (चरण 1, 2, 3, 4) — 3°20′ के नौ चरण एक राशि बनाते हैं।

मीन चर, स्थिर या द्विस्वभाव राशि है?

द्विस्वभाव — मेष से राशियाँ क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव होती हैं (BPHS अध्याय 1)।

ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।

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