मेष राशि — Meṣa
मेष प्रथम राशि है, कालपुरुष का सिर, स्वामी मंगल। पराशर का राशिस्वरूप अध्याय इसे वर्ण, दिशा, जाति और उदय की रीति देता है; फलदीपिका बताती है कि मेष लग्न में जन्मा व्यक्ति कैसा होता है। SIA जन्म-क्षण के लिए लग्न और हर ग्रह की राशि निकालता है और मेष को नामित करने वाले नियम लागू करता है — नीचे के श्लोक वही हैं जिनसे वह पढ़ता है।
एक दृष्टि में
- स्वामी
- मंगलBPHS C01.7
- स्वभाव
- चर · क्रूर, पुरुषBPHS C01.5
- कालपुरुष का अंग
- सिरBPHS C01.4
- तत्त्व · वर्ण (मेलापक)
- अग्नि · क्षत्रियMILAN.VARNA
- विस्तार
- 0°–30°गणित
- यहाँ उच्च
- सूर्य 10°BPHS C02.38b
- यहाँ नीच
- शनि 20°BPHS C02.39b
- मूलत्रिकोण
- मंगल 0°–12°BPHS C02.28
- वश्य राशियाँ
- सिंह · वृश्चिकMILAN.VASYA
- नक्षत्र
- अश्विनी (चरण 1, 2, 3, 4) · भरणी (चरण 1, 2, 3, 4) · कृत्तिका (चरण 1)गणित
पराशर मेष राशि पर
पित्तानिलस्त्रिधा त्वैक्यं श्लैष्मिकाश्च क्रियादयः। रक्तवर्णो बृहद्गात्रश्चतुष्पाद्रात्रिविक्रमी।।६।।
संस्करण की टीकापित्त, वायु, पित्त वायु कफ तीनों मिले हुए, और कफ प्रकृति है। मेष राशि का लाल वर्ण, बड़ी शरीर, चार पैर, रात में बलवान् है।
पूर्ववासी नृपज्ञातिः शैलचारी रजोगुणी। पृष्ठोदयी पावकी च मेषराशिः कुजाधिपः।।७।।
संस्करण की टीकापूर्व दिशा, क्षत्रिय वर्ण, पर्वतीय प्रदेश में घुमनेवाली, रजोगुणी, पृष्ठोदयी अग्निराशि है और इसके स्वामी मंगल हैं।
शीर्षाननौ तथा बाहू हत्क्रोडकटिवस्तयः। गुह्योरुजानुयुग्मे वै युगले जङ्घके तथा।।४।।
संस्करण की टीकाजन्मलग्न से उक्त बारह राशियाँ क्रम से शिर, मुख, दोनों भुजायें, हृदय, पेट, कटि, बस्ति (नाभिलिंग के मध्यभाग को बस्ति कहते हैं), गुह्यस्थान (स्त्री-पुरुष के चिह्न), उरु, दोनों जानु, जंघे हैं।
चरणौ द्वौ तथा लग्नात् ज्ञेयाः शीर्षादयः क्रमात्। चरस्थिरद्विस्वभावाः क्रूराक्रूरौ नरस्त्रियौ।।५।।
संस्करण की टीकादोनों चरण कालपुरुष के अंग में हैं। मेषादि राशियों की क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव तथा क्रूर, शुभ और पुरुष स्त्री संज्ञायें हैं।
फलदीपिका — मेष लग्न में जन्म
वृत्तेक्षणो दुर्बलजानुरुग्रो भीरुर्जले स्याल्लघुभुक् सुकामी । संचारशीलश्चपलोऽनृतोक्तिर्व्रणाङ्किताङ्गः क्रियभे प्रजातः ॥१॥
संस्करण की टीकाजिसके जन्म के समय मेष राशि का लग्न हो उसके नेत्र गोल होते हैं तथा जातक दुर्बल जानु, रोगी, जल से भय खाने वाला, अल्पभोजी, अत्यन्त कामुक, यायावर, चपल, असत्यभाषी, व्रण (फोड़ा-फुंसी आदि) के चिल्लो [sic, OCR damage for चिह्नों] से युक्त शरीर होता है ॥१॥
प्रश्न
मेष राशि का स्वामी कौन है?
मंगल (Mars), जैसा पराशर राशिस्वरूप अध्याय में कहते हैं।
मेष राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?
अश्विनी (चरण 1, 2, 3, 4), भरणी (चरण 1, 2, 3, 4), कृत्तिका (चरण 1) — 3°20′ के नौ चरण एक राशि बनाते हैं।
मेष चर, स्थिर या द्विस्वभाव राशि है?
चर — मेष से राशियाँ क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव होती हैं (BPHS अध्याय 1)।
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