नक्षत्र 3/27 · Krittika

कृत्तिका नक्षत्र — Kṛttikā

कृत्तिका सत्ताईस नक्षत्रों में 3वाँ है, निरयन राशिचक्र में 26°40′ से 40° तक का 13°20′ का खण्ड, मेष और वृषभ के भीतर। यहाँ जन्मा चन्द्र विंशोत्तरी चक्र सूर्य की दशा (6 वर्ष) से खोलता है, खण्ड का केवल शेष भाग बचा रहता है। कुंडली मिलान में इसका गण राक्षस, योनि मेष (भेड़), नाड़ी अन्त्य है।

एक दृष्टि में

क्रमांक
3 / 27गणित
विस्तार
26°40′ – 40° (13°20′)गणित
राशि
मेष · वृषभगणित
चरण (नवांश राशि)
1: धनु · 2: मकर · 3: कुम्भ · 4: मीनBPHS shodashavarga.11
स्वामी (विंशोत्तरी)
सूर्यBPHS C29.80
विंशोत्तरी वर्ष
6BPHS C29.80
गण
राक्षसMILAN.GANA
योनि
मेष (भेड़)MILAN.YONI
नाड़ी
अन्त्यMILAN.NADI

ग्रंथों में इसका नाम

नीचे के श्लोक वे स्थान हैं जहाँ SIA का भण्डार इस नक्षत्र का नाम छापता है; ऊपर के दशा और मेलापक नियम वह सिद्धान्त हैं जिससे SIA गणना करता है।

BPHS C29.78बृहत् पराशर होरा शास्त्र · दशाध्यायः v12, folio 375

आनयनप्रकारं च शृणुष्व द्विजपुङ्गव। नामनक्षत्रपर्य्यन्तमार्क्षादि कृत्तिकादितः।।१२।।

संस्करण की टीकाहे द्विजश्रेष्ठ! उसके आनयन प्रकार को कह रहा हूँ। कृत्तिका से राशिनाम पर्यन्त ही गिनना चाहिए।।१२।।

BPHS C30.8बृहत् पराशर होरा शास्त्र · दशाध्यायः v27, folio 379

अष्टोत्तरी द्विधा प्रोक्ता शिवादि कृत्तिकादितः । लग्ने सग्रहे शैवाद् विग्रहे कृत्तिकादितः ।।२७।।

संस्करण की टीकाअष्टोत्तरी दशा दो प्रकार की होती है। यदि लग्न में कोई ग्रह हो तो आर्द्रा नक्षत्र से और यदि कोई ग्रह न हो तो कृत्तिका से गणना करना चाहिए।।२७।।

मेलापक सिद्धान्त

MILAN.GANAमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Gaṇa kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थगण (6 गुण) — हर नक्षत्र देव, मनुष्य या राक्षस गण (स्वभाव-वर्ग) का है। एक ही गण 6; देव–मनुष्य 5–6; देव–राक्षस 1; मनुष्य–राक्षस 0। यहाँ का बेमेल (गण दोष) मूल स्वभाव के टकराव का संकेत है, जो चन्द्र-राशि स्वामियों की मित्रता से कम होता है।

MILAN.YONIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Yoni kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थयोनि (4 गुण) — हर नक्षत्र का एक पशु-स्वभाव है (अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, गो, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल, सिंह)। एक ही योनि 4; मित्र योनियाँ 3; सम 2; अमित्र 1; शत्रु-जोड़े (अश्व–महिष, गज–सिंह, मेष–वानर, सर्प–नकुल, श्वान–मृग, मार्जार–मूषक, गो–व्याघ्र) 0। यह सहज, शारीरिक अनुकूलता का माप है।

MILAN.NADIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Nāḍī kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थनाड़ी (8 गुण) — सबसे भारी कूट। 27 नक्षत्र तीन नाड़ियों (आदि, मध्य, अन्त्य) में चक्र से बँटे हैं — शरीर-प्रकृति की धारा। भिन्न नाड़ी पूरे 8 देती है; एक ही नाड़ी 0 देती है और नाड़ी दोष है, मेलापक की सबसे गम्भीर आपत्ति (संतान और स्वास्थ्य से जोड़ी गई)। दोनों चन्द्र एक राशि में भिन्न नक्षत्रों में हों, या एक नक्षत्र में भिन्न चरणों में, तो दोष का शास्त्रीय परिहार है।

प्रश्न

कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी में सूर्य — कृत्तिका में चन्द्र होने पर पहली महादशा सूर्य की होती है, पूर्ण रूप में 6 वर्ष।

कृत्तिका के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

गण राक्षस, योनि मेष (भेड़), नाड़ी अन्त्य — कुंडली मिलान के तीन नक्षत्र-आधारित कूट, 6, 4 और 8 गुण के।

कृत्तिका किस राशि में है?

मेष और वृषभ — इसके चार चरण नवांश राशियों धनु, मकर, कुम्भ, मीन में पड़ते हैं।

ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।

SIA में अपनी कुंडली बनाइए — व्याख्या की हर पंक्ति के साथ उसका श्लोक।

सम्बन्धित

हर चिह्न SIA के भण्डार का वास्तविक श्लोक-क्रमांक है — वही चिह्न जो ऐप अपनी व्याख्याओं के साथ छापता है। · अद्यतन

इस पृष्ठ का सन्दर्भ दें: SIA Vigyanhttps://siavigyan.com/hi/learn/nakshatra/krittika