नक्षत्र 25/27 · Purva Bhadrapada

पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र — Pūrvabhādrapadā

पूर्वाभाद्रपदा सत्ताईस नक्षत्रों में 25वाँ है, निरयन राशिचक्र में 320° से 333°20′ तक का 13°20′ का खण्ड, कुम्भ और मीन के भीतर। यहाँ जन्मा चन्द्र विंशोत्तरी चक्र गुरु की दशा (16 वर्ष) से खोलता है, खण्ड का केवल शेष भाग बचा रहता है। कुंडली मिलान में इसका गण मनुष्य, योनि सिंह, नाड़ी आदि है।

एक दृष्टि में

क्रमांक
25 / 27गणित
विस्तार
320° – 333°20′ (13°20′)गणित
राशि
कुम्भ · मीनगणित
चरण (नवांश राशि)
1: मेष · 2: वृषभ · 3: मिथुन · 4: कर्कBPHS shodashavarga.11
स्वामी (विंशोत्तरी)
गुरुBPHS C29.80
विंशोत्तरी वर्ष
16BPHS C29.80
गण
मनुष्यMILAN.GANA
योनि
सिंहMILAN.YONI
नाड़ी
आदिMILAN.NADI

ग्रंथों में इसका नाम

नीचे के श्लोक वे स्थान हैं जहाँ SIA का भण्डार इस नक्षत्र का नाम छापता है; ऊपर के दशा और मेलापक नियम वह सिद्धान्त हैं जिससे SIA गणना करता है।

BPHS C49.34बृहत् पराशर होरा शास्त्र · अब्दचर्याध्यायः v7, folio 707

दस्रश्च मृगशीर्षश्च शर्वः पुष्यश्च सैंद्रभम् । उत्तराविश्वजिच्छ्रोणी चित्रा पुष्यश्च वायुभम् ।।७।। अभिजिद्वसुभं पौष्णं कृत्तिका च पुनर्वसुः । पूर्वोत्तरप्रोष्ठपदौ शततारा च विश्वभम् ।।८।।

संस्करण की टीकाअश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, आर्द्रा, उत्तरा, पूर्वाषाढ़, श्रवण, चित्रा, पुष्य, स्वाती।।७।। अभिजित्, धनिष्ठा, रेवती, कृत्तिका, पुनर्वसु, पूर्वाभाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, शतभिष, उत्तराषाढ।।८।।

मेलापक सिद्धान्त

MILAN.GANAमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Gaṇa kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थगण (6 गुण) — हर नक्षत्र देव, मनुष्य या राक्षस गण (स्वभाव-वर्ग) का है। एक ही गण 6; देव–मनुष्य 5–6; देव–राक्षस 1; मनुष्य–राक्षस 0। यहाँ का बेमेल (गण दोष) मूल स्वभाव के टकराव का संकेत है, जो चन्द्र-राशि स्वामियों की मित्रता से कम होता है।

MILAN.YONIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Yoni kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थयोनि (4 गुण) — हर नक्षत्र का एक पशु-स्वभाव है (अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, गो, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल, सिंह)। एक ही योनि 4; मित्र योनियाँ 3; सम 2; अमित्र 1; शत्रु-जोड़े (अश्व–महिष, गज–सिंह, मेष–वानर, सर्प–नकुल, श्वान–मृग, मार्जार–मूषक, गो–व्याघ्र) 0। यह सहज, शारीरिक अनुकूलता का माप है।

MILAN.NADIमेलापक सिद्धान्त · मुहूर्त चिन्तामणि परम्परा · Melāpaka · Nāḍī kūṭa (Vivāha-prakaraṇa tradition)

भावार्थनाड़ी (8 गुण) — सबसे भारी कूट। 27 नक्षत्र तीन नाड़ियों (आदि, मध्य, अन्त्य) में चक्र से बँटे हैं — शरीर-प्रकृति की धारा। भिन्न नाड़ी पूरे 8 देती है; एक ही नाड़ी 0 देती है और नाड़ी दोष है, मेलापक की सबसे गम्भीर आपत्ति (संतान और स्वास्थ्य से जोड़ी गई)। दोनों चन्द्र एक राशि में भिन्न नक्षत्रों में हों, या एक नक्षत्र में भिन्न चरणों में, तो दोष का शास्त्रीय परिहार है।

प्रश्न

पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी में गुरु — पूर्वाभाद्रपदा में चन्द्र होने पर पहली महादशा गुरु की होती है, पूर्ण रूप में 16 वर्ष।

पूर्वाभाद्रपदा के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

गण मनुष्य, योनि सिंह, नाड़ी आदि — कुंडली मिलान के तीन नक्षत्र-आधारित कूट, 6, 4 और 8 गुण के।

पूर्वाभाद्रपदा किस राशि में है?

कुम्भ और मीन — इसके चार चरण नवांश राशियों मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क में पड़ते हैं।

ये श्लोक अपनी कुंडली पर लागू होते देखिए।

SIA में अपनी कुंडली बनाइए — व्याख्या की हर पंक्ति के साथ उसका श्लोक।

सम्बन्धित

हर चिह्न SIA के भण्डार का वास्तविक श्लोक-क्रमांक है — वही चिह्न जो ऐप अपनी व्याख्याओं के साथ छापता है। · अद्यतन

इस पृष्ठ का सन्दर्भ दें: SIA Vigyanhttps://siavigyan.com/hi/learn/nakshatra/purva-bhadrapada